उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुमन बाटिका सबहिं लगाई। बिबिध भाँति करि जतन बनाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसभी लोगोंने भिन्न-भिन्न प्रकारकी पुष्पोंकी वाटिकाएँ यत्न करके लगा रखी हैं, जिनमें बहुत जातियोंकी सुन्दर और ललित लताएँ सदा वसंतकी तरह फूलती रहती हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 937 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुमन बाटिका सबहिं लगाई। बिबिध भाँति करि जतन बनाई।।
लता ललित बहु जाति सुहाई। फूलहिं सदा बंसत कि नाई।।
स्रोत अभिलेख 7.28 · पुस्तक पृ. 937, 937
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुमन बाटिका सबहिं लगाई। बिबिध भाँति करि जतन बनाई।।
English explanation
AI-draft meaning: Everyone planted flower gardens and carefully arranged them in various ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमन | फूल | flowers |
| बाटिका | वाटिका; बगीचा | garden |
| सबहिं | सभी ने | everyone |
| लगाई | लगाईं | planted |
| बिबिध | विविध | various |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| करि | करके | having made |
| जतन | यत्न; सावधानीपूर्ण प्रयास | careful effort |
| बनाई | बनाईं और सँवारीं | laid out and arranged |
2 लता ललित बहु जाति सुहाई। फूलहिं सदा बंसत कि नाई।।
English explanation
Lovely, graceful creepers of many kinds always bloom as though it were spring.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लता | लताएँ | creepers |
| ललित | सुंदर; मनोहर | graceful |
| बहु | अनेक | many |
| जाति | जातियों की | of kinds |
| सुहाई | सुहावनी | lovely |
| फूलहिं | फूलती हैं | bloom |
| सदा | सदा | always |
| बंसत | वसंत ऋतु | spring |
| कि | के | of |
| नाई | समान; की तरह | like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 937
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 937, 937
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।