उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु खगपति यह कथा पावनी। त्रिबिध ताप भव भय दावनी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे गरुडज़ी! सुनिये, यह कथा [सबको] पवित्र करनेवाली है, [दैहिक, दैविक, भौतिक] तीनों प्रकारके तापोंका और जन्म-मृत्युके भयका नाश करनेवाली है। महाराज श्रीरामचन्द्रजीके कल्याणमय राज्याभिषेकका चरित्र [निष्कामभावसे] सुनकर मनुष्य वैराग्य और ज्ञान प्राप्त करते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 925 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनु खगपति यह कथा पावनी। त्रिबिध ताप भव भय दावनी।।
महाराज कर सुभ अभिषेका। सुनत लहहिं नर बिरति बिबेका।।
स्रोत अभिलेख 7.15 · पुस्तक पृ. 925, 925
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनु खगपति यह कथा पावनी। त्रिबिध ताप भव भय दावनी।।
English explanation
AI draft: Listen, Garuda, king of birds: this story purifies and destroys the three kinds of suffering and the fear of worldly existence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनिए | listen |
| खगपति | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| यह | यह | this |
| कथा | कथा | story |
| पावनी | पवित्र करने वाली | purifying |
| त्रिबिध | तीन प्रकार के | threefold |
| ताप | कष्ट | sufferings |
| भव | संसार का | of worldly existence |
| भय | भय | fear |
| दावनी | नष्ट करने वाली | destroying |
2 महाराज कर सुभ अभिषेका। सुनत लहहिं नर बिरति बिबेका।।
English explanation
By hearing the account of King Rama’s auspicious coronation, people gain detachment and discernment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महाराज | महाराज राम | King Rama |
| कर | का | of |
| सुभ | शुभ | auspicious |
| अभिषेका | राज्याभिषेक | coronation |
| सुनत | सुनने पर | upon hearing |
| लहहिं | प्राप्त करते हैं | gain |
| नर | मनुष्य | people |
| बिरति | वैराग्य | detachment |
| बिबेका | विवेक | discernment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 925
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 925, 925
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।