उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जे सकाम नर सुनहिं जे गावहिं। सुख संपति नाना बिधि पावहिं।।
मूल पाठ
जे सकाम नर सुनहिं जे गावहिं। सुख संपति नाना बिधि पावहिं।।
सुर दुर्लभ सुख करि जग माहीं। अंतकाल रघुपति पुर जाहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.15 · पुस्तक पृ. 925, 925
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर जो मनुष्य सकामभावसे सुनते और जो गाते हैं, वे अनेकों प्रकारके सुख और सम्पत्ति पाते हैं। वे जगत्में देवदुर्लभ सुखोंको भोगकर अन्तकालमें श्रीरघुनाथजीके परमधामको जाते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 925 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जे सकाम नर सुनहिं जे गावहिं। सुख संपति नाना बिधि पावहिं।।
English explanation
People who listen to or sing it with desires gain happiness and prosperity of many kinds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो | those who |
| सकाम | कामनाओं वाले | having desires |
| नर | मनुष्य | people |
| सुनहिं | सुनते हैं | listen |
| जे | जो | those who |
| गावहिं | गाते हैं | sing |
| सुख | सुख | happiness |
| संपति | संपत्ति और समृद्धि | wealth and prosperity |
| नाना | अनेक | many |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| पावहिं | प्राप्त करते हैं | obtain |
2 सुर दुर्लभ सुख करि जग माहीं। अंतकाल रघुपति पुर जाहीं।।
English explanation
After enjoying in this world pleasures rare even for the gods, they go to Rama’s abode at life’s end.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवताओं के लिए | for the gods |
| दुर्लभ | दुर्लभ | rare |
| सुख | सुख | pleasures |
| करि | भोगकर | having enjoyed |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
| अंतकाल | जीवन के अंत में | at life’s end |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम का | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| पुर | धाम | abode |
| जाहीं | जाते हैं | go |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 925
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 925, 925
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