उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनहिं बिमुक्त बिरत अरु बिषई। लहहिं भगति गति संपति नई।।
मूल पाठ
सुनहिं बिमुक्त बिरत अरु बिषई। लहहिं भगति गति संपति नई।।
खगपति राम कथा मैं बरनी। स्वमति बिलास त्रास दुख हरनी।।
स्रोत अभिलेख 7.15 · पुस्तक पृ. 925, 925
भावार्थ
मूल पाठ के बादइसे जो जीवन्मुक्त, विरक्त और विषयी सुनते हैं, वे [क्रमश:] भक्ति, मुक्ति और नवीन सम्पत्ति (नित्य नये भोग) पाते हैं। हे पक्षिराज गरुडज़ी! मैंने अपनी बुद्धिकी पहुँचके अनुसार रामकथा वर्णन की है, जो [जन्म-मरणके] भय और दु:खको हरनेवाली है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 925 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनहिं बिमुक्त बिरत अरु बिषई। लहहिं भगति गति संपति नई।।
English explanation
The liberated, the detached, and those attached to sense pleasures hear it and gain devotion, spiritual attainment, and fresh prosperity, respectively.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहिं | सुनते हैं | hear |
| बिमुक्त | मुक्त जन | the liberated |
| बिरत | विरक्त जन | the detached |
| अरु | और | and |
| बिषई | विषयों में आसक्त जन | those attached to sense pleasures |
| लहहिं | प्राप्त करते हैं | gain |
| भगति | भक्ति | devotion |
| गति | सद्गति अथवा मुक्ति | spiritual attainment or liberation |
| संपति | संपत्ति | prosperity |
| नई | नई | new |
2 खगपति राम कथा मैं बरनी। स्वमति बिलास त्रास दुख हरनी।।
English explanation
O king of birds, I have narrated Rama’s story as an expression of my own understanding; it removes fear and sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खगपति | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| राम | भगवान राम की | of Lord Rama |
| कथा | कथा | story |
| मैं | मैंने | I |
| बरनी | वर्णन किया | narrated |
| स्वमति | अपनी बुद्धि का | of my own understanding |
| बिलास | अभिव्यक्ति | expression |
| त्रास | भय | fear |
| दुख | दुख | sorrow |
| हरनी | हरने वाली | removing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 925
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 925, 925
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।