उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि मुनि आसिष सुनु मतिधीरा। ब्रह्मगिरा भइ गगन गँभीरा।।
मूल पाठ
सुनि मुनि आसिष सुनु मतिधीरा। ब्रह्मगिरा भइ गगन गँभीरा।।
एवमस्तु तव बच मुनि ग्यानी। यह मम भगत कर्म मन बानी।।
स्रोत अभिलेख 7.114 · पुस्तक पृ. 1021, 1022
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे धीरबुद्धि गरुडज़ी! सुनिये, मुनिका आशीर्वाद सुनकर आकाशमें गम्भीर ब्रह्मवाणी हुई कि हे ज्ञानी मुनि! तुम्हारा वचन ऐसा ही (सत्य) हो। यह कर्म, मन और वचनसे मेरा भक्त है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1022 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनि मुनि आसिष सुनु मतिधीरा। ब्रह्मगिरा भइ गगन गँभीरा।।
English explanation
Listen, O steady-minded one: on hearing the sage’s blessing, a solemn divine voice arose in the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| मुनि | मुनि का | the sage’s |
| आसिष | आशीर्वाद | blessing |
| सुनु | सुनो | listen |
| मतिधीरा | हे स्थिर बुद्धि वाले | O steady-minded one |
| ब्रह्मगिरा | दिव्य वाणी | divine utterance |
| भइ | हुई; प्रकट हुई | arose |
| गगन | आकाश में | in the sky |
| गँभीरा | गंभीर; गूँजती हुई | solemn; resonant |
2 एवमस्तु तव बच मुनि ग्यानी। यह मम भगत कर्म मन बानी।।
English explanation
‘O wise sage, let your words come true. This one is my devotee in deed, mind, and speech.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एवमस्तु | ऐसा ही हो | so be it |
| तव | तुम्हारा | your |
| बच | वचन | word |
| मुनि | हे मुनि | O sage |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise |
| यह | यह व्यक्ति | this one |
| मम | मेरा | my |
| भगत | भक्त | devotee |
| कर्म | कर्म से | in deed |
| मन | मन से | in mind |
| बानी | वाणी से | in speech |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.114
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1022
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1021, 1022
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