उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिनु श्रम तुम्ह जानब सब सोऊ। नित नव नेह राम पद होऊ।।
मूल पाठ
बिनु श्रम तुम्ह जानब सब सोऊ। नित नव नेह राम पद होऊ।।
जो इच्छा करिहहु मन माहीं। हरि प्रसाद कछु दुर्लभ नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.114 · पुस्तक पृ. 1021, 1022
भावार्थ
मूल पाठ के बादतुम उन सबको भी बिना ही परिश्रम जान जाओगे। श्रीरामजीके चरणोंमें तुम्हारा नित्य नया प्रेम हो। अपने मनमें तुम जो कुछ इच्छा करोगे, श्रीहरिकी कृपासे उसकी पूर्ति कुछ भी दुर्लभ नहीं होगी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1021 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बिनु श्रम तुम्ह जानब सब सोऊ। नित नव नेह राम पद होऊ।।
English explanation
You will know all of that without effort; may your love for Rama’s feet be ever renewed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनु | बिना | without |
| श्रम | परिश्रम | effort |
| तुम्ह | तुम | you |
| जानब | जानोगे | will know |
| सब | सारा | all |
| सोऊ | वह सब भी | all that |
| नित | नित्य | daily; always |
| नव | नया | fresh |
| नेह | प्रेम | love |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| पद | चरणों में | for the feet |
| होऊ | होता रहे | may it continue to be |
2 जो इच्छा करिहहु मन माहीं। हरि प्रसाद कछु दुर्लभ नाहीं।।
English explanation
Whatever you desire in your heart, nothing will be difficult to obtain through Hari’s grace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो भी | whatever |
| इच्छा | चाह | desire |
| करिहहु | करोगे | you will form |
| मन | मन | the heart |
| माहीं | में | within |
| हरि | भगवान हरि की | of Lord Hari |
| प्रसाद | कृपा से | through grace |
| कछु | कुछ भी | anything |
| दुर्लभ | कठिनाई से मिलने वाला | hard to obtain |
| नाहीं | नहीं | not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.114
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1021
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1021, 1022
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।