उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि भुसुंडि के बचन सुहाए। हरषित खगपति पंख फुलाए।।
मूल पाठ
सुनि भुसुंडि के बचन सुहाए। हरषित खगपति पंख फुलाए।।
नयन नीर मन अति हरषाना। श्रीरघुपति प्रताप उर आना।।
स्रोत अभिलेख 7.93 · पुस्तक पृ. 995, 995
भावार्थ
मूल पाठ के बादभुशुण्डिजीके सुन्दर वचन सुनकर पक्षिराजने हर्षित होकर अपने पंख फुला लिये। उनके नेत्रोंमें [प्रेमानन्दके आँसुओंका] जल आ गया और मन अत्यन्त हर्षित हो गया। उन्होंने श्रीरघुनाथजीका प्रताप हृदयमें धारण किया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 995 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि भुसुंडि के बचन सुहाए। हरषित खगपति पंख फुलाए।।
English explanation
Hearing Bhushundi’s pleasing words, Garuda, king of birds, rejoiced and spread his feathers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| भुसुंडि | काकभुसुंडि, कौए के रूप में रामभक्त वक्ता | Kakabhushundi, the crow devotee speaking about Rama |
| के | के | of |
| बचन | वचन | words |
| सुहाए | सुंदर, मनभावन | pleasing |
| हरषित | आनंदित | delighted |
| खगपति | पक्षिराज गरुड़ | Garuda, king of birds |
| पंख | पंख | feathers |
| फुलाए | फुला लिए, फैला लिए | fluffed up; spread out |
2 नयन नीर मन अति हरषाना। श्रीरघुपति प्रताप उर आना।।
English explanation
Tears filled his eyes and his heart rejoiced greatly; the glory of Lord Rama entered his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नयन | आँखों में | in the eyes |
| नीर | जल, आँसू | water; tears |
| मन | मन | heart; mind |
| अति | अत्यंत | greatly |
| हरषाना | आनंदित हुआ | rejoiced |
| श्रीरघुपति | श्रीराम का | of Lord Rama, lord of Raghu’s lineage |
| प्रताप | प्रताप, महिमा | glory; majesty |
| उर | हृदय में | into the heart |
| आना | आ गया, अनुभव में आया | entered; became inwardly evident |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.93
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 995
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 995, 995
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