उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि प्रभु बचन हरषि मुनि चारी। पुलकित तन अस्तुति अनुसारी।।
मूल पाठ
सुनि प्रभु बचन हरषि मुनि चारी। पुलकित तन अस्तुति अनुसारी।।
जय भगवंत अनंत अनामय। अनघ अनेक एक करुनामय।।
स्रोत अभिलेख 7.34 · पुस्तक पृ. 942, 943
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभुके वचन सुनकर चारों मुनि हर्षित होकर, पुलकित शरीरसे स्तुति करने लगे—हे भगवन्! आपकी जय हो। आप अन्तरहित, विकाररहित, पापरहित, अनेक (सब रूपोंमें प्रकट), एक (अद्वितीय) और करुणामय हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 942 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि प्रभु बचन हरषि मुनि चारी। पुलकित तन अस्तुति अनुसारी।।
English explanation
AI-draft meaning: Hearing the Lord’s words, the four sages rejoiced. Their bodies thrilled with joy, and they began offering praise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| बचन | वचन | words |
| हरषि | हर्षित होकर | rejoicing |
| मुनि | मुनि; यहाँ सनकादि ऋषि | sages; here, Sanaka and his brothers |
| चारी | चारों | all four |
| पुलकित | रोमांचित | thrilled, with hair standing on end |
| तन | शरीर | bodies |
| अस्तुति | स्तुति | praise |
| अनुसारी | करने लगे | began offering |
2 जय भगवंत अनंत अनामय। अनघ अनेक एक करुनामय।।
English explanation
Victory to you, O Lord—infinite, free from affliction, sinless, manifest as many yet one, and full of compassion!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जय | जय हो | victory to you |
| भगवंत | हे भगवान | O blessed Lord |
| अनंत | असीम | infinite |
| अनामय | रोग और विकार से रहित | free from illness and affliction |
| अनघ | पाप और दोष से रहित | sinless and faultless |
| अनेक | अनेक रूपों में प्रकट | manifest in many forms |
| एक | एक ही | one alone |
| करुनामय | करुणा से भरे हुए | full of compassion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.34
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 942
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 942, 943
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।