उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि प्रभु बचन मगन सब भए। को हम कहाँ बिसरि तन गए।।
मूल पाठ
सुनि प्रभु बचन मगन सब भए। को हम कहाँ बिसरि तन गए।।
एकटक रहे जोरि कर आगे। सकहिं न कछु कहि अति अनुरागे।।
स्रोत अभिलेख 7.17 · पुस्तक पृ. 926, 927
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभुके वचन सुनकर सब-के-सब प्रेममग्र हो गये। हम कौन हैं और कहाँ हैं? यह देहकी सुध भी भूल गयी। वे प्रभुके सामने हाथ जोड़कर टकटकी लगाये देखते ही रह गये। अत्यन्त प्रेमके कारण कुछ कह नहीं सकते॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 926 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि प्रभु बचन मगन सब भए। को हम कहाँ बिसरि तन गए।।
English explanation
Hearing the Lord’s words, all became absorbed in love. They forgot who they were and where they were, losing even awareness of their bodies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| बचन | वचन | words |
| मगन | प्रेम में मग्न | absorbed in love |
| सब | सभी | all |
| भए | हो गए | became |
| को | कौन | who |
| हम | हम | we |
| कहाँ | कहाँ हैं | where we are |
| बिसरि | भूलकर | forgetting |
| तन | शरीर की सुध | awareness of the body |
| गए | भूल गए | lost awareness |
2 एकटक रहे जोरि कर आगे। सकहिं न कछु कहि अति अनुरागे।।
English explanation
With folded hands, they remained before the Lord, gazing steadily; their overwhelming love left them unable to say anything.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एकटक | एकटक देखते हुए | gazing steadily |
| रहे | रहे | remained |
| जोरि | जोड़कर | having joined |
| कर | हाथ | hands |
| आगे | प्रभु के सामने | before the Lord |
| सकहिं | सकते हैं | are able |
| न | नहीं | not |
| कछु | कुछ | anything |
| कहि | कह | say |
| अति | अत्यधिक | overwhelming |
| अनुरागे | प्रेम में डूबे हुए | absorbed in love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 926
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 926, 927
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।