उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परम प्रेम तिन्ह कर प्रभु देखा। कहा बिबिध बिधि ग्यान बिसेषा।।
मूल पाठ
परम प्रेम तिन्ह कर प्रभु देखा। कहा बिबिध बिधि ग्यान बिसेषा।।
प्रभु सन्मुख कछु कहन न पारहिं। पुनि पुनि चरन सरोज निहारहिं।।
स्रोत अभिलेख 7.17 · पुस्तक पृ. 926, 927
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभुने उनका अत्यन्त प्रेम देखा, [तब] उन्हें अनेकों प्रकारसे विशेष ज्ञानका उपदेश दिया। प्रभुके सम्मुख वे कुछ कह नहीं सकते। बार-बार प्रभुके चरणकमलोंको देखते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 927 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 परम प्रेम तिन्ह कर प्रभु देखा। कहा बिबिध बिधि ग्यान बिसेषा।।
English explanation
The Lord saw their profound love and imparted special wisdom in various ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परम | अत्यंत गहरा | supreme; profound |
| प्रेम | प्रेम | love |
| तिन्ह | उनका | their |
| कर | का | of |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| देखा | देखा | saw |
| कहा | बताया; उपदेश दिया | explained; imparted |
| बिबिध | अनेक | various |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| ग्यान | ज्ञान | wisdom |
| बिसेषा | विशेष | special |
2 प्रभु सन्मुख कछु कहन न पारहिं। पुनि पुनि चरन सरोज निहारहिं।।
English explanation
They cannot say anything in the Lord’s presence and repeatedly gaze at his lotus-like feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| सन्मुख | सामने | in the presence |
| कछु | कुछ | anything |
| कहन | कहने | to say |
| न | नहीं | not |
| पारहिं | सकते | are able |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| चरन | चरण | feet |
| सरोज | कमल-समान | lotus-like |
| निहारहिं | निहारते हैं | gaze at |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 927
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 926, 927
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।