उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब प्रभु भूषन बसन मगाए। नाना रंग अनूप सुहाए।।
मूल पाठ
तब प्रभु भूषन बसन मगाए। नाना रंग अनूप सुहाए।।
सुग्रीवहि प्रथमहिं पहिराए। बसन भरत निज हाथ बनाए।।
स्रोत अभिलेख 7.17 · पुस्तक पृ. 926, 927
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब प्रभुने अनेक रंगोंके अनुपम और सुन्दर गहने-कपड़े मँगवाये। सबसे पहले भरतजीने अपने हाथसे सँवारकर सुग्रीवको वस्त्राभूषण पहनाये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 927 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब प्रभु भूषन बसन मगाए। नाना रंग अनूप सुहाए।।
English explanation
Then the Lord had ornaments and garments brought, lovely and matchless in their many colors.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| बसन | वस्त्र | garments |
| मगाए | मँगवाए | had brought |
| नाना | अनेक | many |
| रंग | रंगों के | in colors |
| अनूप | अनुपम | matchless |
| सुहाए | सुंदर; सुहावने | lovely; pleasing |
2 सुग्रीवहि प्रथमहिं पहिराए। बसन भरत निज हाथ बनाए।।
English explanation
Sugriva was clothed first; Bharata personally dressed him, arranging the garments with his own hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुग्रीवहि | वानरराज सुग्रीव को | to Sugriva, the monkey king |
| प्रथमहिं | सबसे पहले | first of all |
| पहिराए | पहनाए | put on him |
| बसन | वस्त्र | garments |
| भरत | राम के भाई भरत ने | Bharata, Rama’s brother |
| निज | अपने | his own |
| हाथ | हाथों से | with his hands |
| बनाए | सँवारकर पहनाए | arranged and fitted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 927
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 926, 927
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।