उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु प्रेरित लछिमन पहिराए। लंकापति रघुपति मन भाए।।
मूल पाठ
प्रभु प्रेरित लछिमन पहिराए। लंकापति रघुपति मन भाए।।
अंगद बैठ रहा नहिं डोला। प्रीति देखि प्रभु ताहि न बोला।।
स्रोत अभिलेख 7.17 · पुस्तक पृ. 926, 927
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर प्रभुकी प्रेरणासे लक्ष्मणजीने विभीषणजीको गहने-कपड़े पहनाये, जो श्रीरघुनाथजीके मनको बहुत ही अच्छे लगे। अंगद बैठे ही रहे, वे अपनी जगहसे हिलेतक नहीं। उनका उत्कट प्रेम देखकर प्रभुने उनको नहीं बुलाया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 927 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रभु प्रेरित लछिमन पहिराए। लंकापति रघुपति मन भाए।।
English explanation
At the Lord’s prompting, Lakshmana clothed Vibhishana, the lord of Lanka, who was dear to Rama’s heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम द्वारा | by Lord Rama |
| प्रेरित | प्रेरित होकर | prompted |
| लछिमन | राम के भाई लक्ष्मण ने | Lakshmana, Rama’s brother |
| पहिराए | वस्त्र पहनाए | clothed |
| लंकापति | लंका के राजा विभीषण को | Vibhishana, lord of Lanka |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम के | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| मन | मन को | to the heart |
| भाए | प्रिय लगे हुए | dear; pleasing |
2 अंगद बैठ रहा नहिं डोला। प्रीति देखि प्रभु ताहि न बोला।।
English explanation
Angada remained seated and did not stir. Seeing his love, the Lord said nothing to him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंगद | बालि के पुत्र अंगद | Angada, son of Vali |
| बैठ | बैठे | seated |
| रहा | रहे | remained |
| नहिं | नहीं | not |
| डोला | हिले | stirred |
| प्रीति | अंगद का प्रेम | Angada’s love |
| देखि | देखकर | seeing |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| ताहि | उनसे; अंगद से | to him; to Angada |
| न | नहीं | not |
| बोला | कुछ कहा | spoke |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 927
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 926, 927
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।