उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि प्रभु बचन अधिक अनुरागेउँ। मन अनुमान करन तब लागेऊँ।।
मूल पाठ
सुनि प्रभु बचन अधिक अनुरागेउँ। मन अनुमान करन तब लागेऊँ।।
प्रभु कह देन सकल सुख सही। भगति आपनी देन न कही।।
स्रोत अभिलेख 7.84 · पुस्तक पृ. 986, 986
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभुके वचन सुनकर मैं बहुत ही प्रेममें भर गया। तब मनमें अनुमान करने लगा कि प्रभुने सब सुखोंके देनेकी बात कही, यह तो सत्य है; पर अपनी भक्ति देनेकी बात नहीं कही॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 986 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनि प्रभु बचन अधिक अनुरागेउँ। मन अनुमान करन तब लागेऊँ।।
English explanation
Hearing the Lord’s words, I grew still more loving toward him. Then I began to reflect inwardly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| बचन | वचन | words |
| अधिक | और अधिक | still more |
| अनुरागेउँ | मैं प्रेम से भर गया | I became filled with love |
| मन | मन में | in my mind |
| अनुमान | विचार | reflection |
| करन | करने | to undertake |
| तब | तब | then |
| लागेऊँ | मैं लगा | I began |
2 प्रभु कह देन सकल सुख सही। भगति आपनी देन न कही।।
English explanation
The Lord indeed spoke of granting every happiness, but did not speak of granting devotion to himself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| कह | कहा | said |
| देन | देने को | he would grant |
| सकल | सभी | all |
| सुख | सुख | happiness |
| सही | निश्चय ही | indeed |
| भगति | भक्ति | devotion |
| आपनी | अपने प्रति | to himself |
| देन | देने की बात | of granting |
| न | नहीं | not |
| कही | कही | spoke |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.84
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 986
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 986, 986
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।