उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भगति हीन गुन सब सुख ऐसे। लवन बिना बहु बिंजन जैसे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभक्तिसे रहित सब गुण और सब सुख वैसे ही (फीके) हैं जैसे नमकके बिना बहुत प्रकारके भोजनके पदार्थ। भजनसे रहित सुख किस कामके? हे पक्षिराज! ऐसा विचारकर मैं बोला—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 986 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भगति हीन गुन सब सुख ऐसे। लवन बिना बहु बिंजन जैसे।।
भजन हीन सुख कवने काजा। अस बिचारि बोलेउँ खगराजा।।
स्रोत अभिलेख 7.84 · पुस्तक पृ. 986, 986
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भगति हीन गुन सब सुख ऐसे। लवन बिना बहु बिंजन जैसे।।
English explanation
Without devotion, virtues and all pleasures are like many dishes without salt.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगति | भक्ति से | of devotion |
| हीन | रहित | devoid |
| गुन | गुण | virtues |
| सब | सभी | all |
| सुख | सुख | pleasures |
| ऐसे | वैसे हैं | are like this |
| लवन | नमक | salt |
| बिना | के बिना | without |
| बहु | अनेक | many |
| बिंजन | व्यंजन | dishes |
| जैसे | जैसे | just as |
2 भजन हीन सुख कवने काजा। अस बिचारि बोलेउँ खगराजा।।
English explanation
What use is happiness without worship? O king of birds, having thought thus, I spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भजन | प्रभु के भजन से | of worship of the Lord |
| हीन | रहित | devoid |
| सुख | सुख | happiness |
| कवने | किस | what |
| काजा | काम के | use is it |
| अस | ऐसा | thus |
| बिचारि | विचार करके | having reflected |
| बोलेउँ | मैं बोला | I spoke |
| खगराजा | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.84
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 986
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 986, 986
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।