उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनहु राम कर सहज सुभाऊ। जन अभिमान न राखहिं काऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजीका सहज स्वभाव सुनिये। वे भक्तमें अभिमान कभी नहीं रहने देते। क्योंकि अभिमान जन्म-मरणरूप संसारका मूल है और अनेक प्रकारके क्लेशों तथा समस्त शोकोंका देनेवाला है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 977 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनहु राम कर सहज सुभाऊ। जन अभिमान न राखहिं काऊ।।
संसृत मूल सूलप्रद नाना। सकल सोक दायक अभिमाना।।
स्रोत अभिलेख 7.74 · पुस्तक पृ. 977, 977
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनहु राम कर सहज सुभाऊ। जन अभिमान न राखहिं काऊ।।
English explanation
Hear Rama’s innate nature: he never lets pride remain in his devotee.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनिए | listen |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| कर | का | of |
| सहज | स्वाभाविक | innate |
| सुभाऊ | स्वभाव | nature |
| जन | अपने भक्त का | of his devotee |
| अभिमान | अहंकार | pride |
| न | नहीं | not |
| राखहिं | रहने देते हैं | allow to remain |
| काऊ | कभी भी | ever |
2 संसृत मूल सूलप्रद नाना। सकल सोक दायक अभिमाना।।
English explanation
Pride is the root of worldly birth and death, causing manifold pain and every sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संसृत | संसार के जन्म-मरण का | of worldly birth and death |
| मूल | मूल कारण | root cause |
| सूलप्रद | पीड़ा देने वाला | pain-causing |
| नाना | अनेक प्रकार की | of many kinds |
| सकल | सभी | all |
| सोक | शोक | sorrows |
| दायक | देने वाला | causing |
| अभिमाना | अभिमान; अहंकार | pride; arrogance |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.74
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 977
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 977, 977
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।