उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम कृपा भाजन तुम्ह ताता। हरि गुन प्रीति मोहि सुखदाता।।
मूल पाठ
राम कृपा भाजन तुम्ह ताता। हरि गुन प्रीति मोहि सुखदाता।।
ताते नहिं कछु तुम्हहिं दुरावउँ। परम रहस्य मनोहर गावउँ।।
स्रोत अभिलेख 7.74 · पुस्तक पृ. 977, 977
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात! आप श्रीरामजीके कृपापात्र हैं। श्रीहरिके गुणोंमें आपकी प्रीति है, इसीलिये आप मुझे सुख देनेवाले हैं। इसीसे मैं आपसे कुछ भी नहीं छिपाता और अत्यन्त रहस्यकी बातें आपको गाकर सुनाता हूँ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 977 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम कृपा भाजन तुम्ह ताता। हरि गुन प्रीति मोहि सुखदाता।।
English explanation
Dear one, you are a recipient of Rama’s grace. Your love for the Lord’s virtues brings me joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम की | of Lord Rama |
| कृपा | कृपा | grace |
| भाजन | पात्र | recipient |
| तुम्ह | आप | you |
| ताता | हे प्रिय | dear one |
| हरि | भगवान के | of the Lord |
| गुन | गुणों के प्रति | for the virtues |
| प्रीति | प्रेम | love |
| मोहि | मुझे | to me |
| सुखदाता | सुख देने वाला | bringing joy |
2 ताते नहिं कछु तुम्हहिं दुरावउँ। परम रहस्य मनोहर गावउँ।।
English explanation
Therefore I hide nothing from you; I sing this profound and captivating mystery.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताते | इसलिए | therefore |
| नहिं | नहीं | not |
| कछु | कुछ भी | anything |
| तुम्हहिं | आपसे | from you |
| दुरावउँ | मैं छिपाता हूँ | I conceal |
| परम | अत्यंत गूढ़; सर्वोच्च | profound; supreme |
| रहस्य | रहस्य | mystery |
| मनोहर | मन को मोहने वाला | captivating |
| गावउँ | मैं गाता हूँ | I sing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.74
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 977
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 977, 977
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