उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ताते करहिं कृपानिधि दूरी। सेवक पर ममता अति भूरी।।
मूल पाठ
ताते करहिं कृपानिधि दूरी। सेवक पर ममता अति भूरी।।
जिमि सिसु तन ब्रन होइ गोसाई। मातु चिराव कठिन की नाईं।।
स्रोत अभिलेख 7.74 · पुस्तक पृ. 977, 977
भावार्थ
मूल पाठ के बादइसीलिये कृपानिधि उसे दूर कर देते हैं; क्योंकि सेवकपर उनकी बहुत ही अधिक ममता है। हे गोसाईं! जैसे बच्चेके शरीरमें फोड़ा हो जाता है, तो माता उसे कठोर हृदयकी भाँति चिरा डालती है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 977 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ताते करहिं कृपानिधि दूरी। सेवक पर ममता अति भूरी।।
English explanation
Therefore Rama, the treasury of compassion, removes pride; his affection for his servant is exceedingly great.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताते | इसलिए | therefore |
| करहिं | करते हैं | make |
| कृपानिधि | कृपा के भंडार राम | Rama, treasury of compassion |
| दूरी | दूर; हटाना | away; removal |
| सेवक | अपने सेवक | his servant |
| पर | के प्रति | toward |
| ममता | स्नेह; अपनापन | affection; loving attachment |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| भूरी | बहुत अधिक | great; abundant |
2 जिमि सिसु तन ब्रन होइ गोसाई। मातु चिराव कठिन की नाईं।।
English explanation
My lord, just as when a child develops an abscess on its body, the mother has it lanced as though she were hard-hearted.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिमि | जैसे | just as |
| सिसु | बच्चे के | of a child |
| तन | शरीर में | on the body |
| ब्रन | फोड़ा; घाव | abscess; sore |
| होइ | हो जाए | develops |
| गोसाई | हे स्वामी | my lord |
| मातु | माता | the mother |
| चिराव | चिरवाती है | has it lanced |
| कठिन | कठोर हृदय वाले व्यक्ति | a hard-hearted person |
| की | के | of |
| नाईं | समान; तरह | like; in the manner of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.74
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 977
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 977, 977
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।