उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनहु तात यह अकथ कहानी। समुझत बनइ न जाइ बखानी।।
मूल पाठ
सुनहु तात यह अकथ कहानी। समुझत बनइ न जाइ बखानी।।
ईस्वर अंस जीव अबिनासी। चेतन अमल सहज सुख रासी।।
स्रोत अभिलेख 7.117 · पुस्तक पृ. 1025, 1027
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात! यह अकथनीय कहानी (वार्ता) सुनिये। यह समझते ही बनती है, कही नहीं जा सकती। जीव ईश्वरका अंश है। [अतएव] वह अविनाशी, चेतन, निर्मल और स्वभावसे ही सुखकी राशि है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1025 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनहु तात यह अकथ कहानी। समुझत बनइ न जाइ बखानी।।
English explanation
Dear one, hear this inexpressible account. It can be understood, but cannot be put into words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनो | listen |
| तात | हे प्रिय | dear one |
| यह | यह | this |
| अकथ | कथन से परे | inexpressible |
| कहानी | कथा | account |
| समुझत | समझने में | in understanding |
| बनइ | संभव होता है | is possible |
| न | नहीं | not |
| जाइ | किया जा सकता | can be done |
| बखानी | वर्णित | described |
2 ईस्वर अंस जीव अबिनासी। चेतन अमल सहज सुख रासी।।
English explanation
The individual soul is a part of God: imperishable, conscious, stainless, and naturally an abundance of bliss.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ईस्वर | ईश्वर का | of God |
| अंस | अंश | part |
| जीव | व्यक्तिगत आत्मा | individual soul |
| अबिनासी | अविनाशी | imperishable |
| चेतन | चैतन्यस्वरूप | conscious |
| अमल | निर्मल | stainless |
| सहज | स्वभावतः | by nature |
| सुख | आनंद | bliss |
| रासी | राशि | abundance |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.117
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1025
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1025, 1027
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।