उत्तरकाण्ड · दोहा 116 (ख) · दोहा
औरउ ग्यान भगति कर भेद सुनहु सुप्रबीन।
औरउ ग्यान भगति कर भेद सुनहु सुप्रबीन।
जो सुनि होइ राम पद प्रीति सदा अबिछीन॥ ११६ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.116 · पुस्तक पृ. 1025, 1025
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1औरउ ग्यान भगति कर भेद सुनहु सुप्रबीन।
हे अत्यंत प्रवीण, ज्ञान और भक्ति का भेद भी आगे सुनो।
English explanation
O discerning one, hear further about the distinction between knowledge and devotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| औरउ | और भी; आगे भी | further; also |
| ग्यान | ज्ञान | spiritual knowledge |
| भगति | भक्ति | devotion |
| कर | का | of; between |
| भेद | अंतर | distinction |
| सुनहु | सुनो | listen |
| सुप्रबीन | हे अत्यंत प्रवीण | O highly discerning one |
2जो सुनि होइ राम पद प्रीति सदा अबिछीन॥ ११६ (ख)॥
जिसे सुनकर राम के चरणों में सदा अटूट प्रेम उत्पन्न होता है।
English explanation
Hearing this gives rise to ever-unbroken love for Rama’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जिसे | which |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| होइ | उत्पन्न होता है | arises |
| राम | श्रीराम के | Rama’s |
| पद | चरणों में | at the feet |
| प्रीति | प्रेम | love |
| सदा | सदैव | always |
| अबिछीन | अटूट; अविच्छिन्न | unbroken; uninterrupted |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 116 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.116
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1025, 1025
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।