उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनत सुधासम बचन राम के। गहे सबनि पद कृपाधाम के।।
मूल पाठ
सुनत सुधासम बचन राम के। गहे सबनि पद कृपाधाम के।।
जननि जनक गुर बंधु हमारे। कृपा निधान प्रान ते प्यारे।।
स्रोत अभिलेख 7.47 · पुस्तक पृ. 953, 954
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजीके अमृतके समान वचन सुनकर सबने कृपाधामके चरण पकड़ लिये [और कहा—] हे कृपानिधान! आप हमारे माता, पिता, गुरु, भाई सब कुछ हैं और प्राणोंसे भी अधिक प्रिय हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 953 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनत सुधासम बचन राम के। गहे सबनि पद कृपाधाम के।।
English explanation
Hearing Rama’s nectar-like words, everyone clasped the feet of Rama, the abode of compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | upon hearing |
| सुधासम | अमृत के समान | like nectar |
| बचन | वचन | words |
| राम | भगवान राम | Rama |
| के | के | of |
| गहे | पकड़ लिए | clasped |
| सबनि | सबने | everyone |
| पद | चरण | feet |
| कृपाधाम | कृपा के धाम राम | Rama, the abode of compassion |
| के | के | of |
2 जननि जनक गुर बंधु हमारे। कृपा निधान प्रान ते प्यारे।।
English explanation
O treasury of compassion, you are our mother, father, teacher, and kinsman, dearer to us than life itself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जननि | माता | mother |
| जनक | पिता | father |
| गुर | गुरु | teacher |
| बंधु | बंधु | kinsman |
| हमारे | हमारे | our |
| कृपा | करुणा | compassion |
| निधान | भंडार | treasury |
| प्रान | प्राणों | life |
| ते | से | than |
| प्यारे | अधिक प्रिय | dearer |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.47
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 953
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका प्रजाको उपदेश (श्रीरामगीता), पुरवासियोंकी कृतज्ञता
- मुद्रित पृष्ठ
- 953, 954
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