उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनत सकल जननीं उठि धाईं। कहि प्रभु कुसल भरत समुझाई।।
मूल पाठ
सुनत सकल जननीं उठि धाईं। कहि प्रभु कुसल भरत समुझाई।।
समाचार पुरबासिन्ह पाए। नर अरु नारि हरषि सब धाए।।
स्रोत अभिलेख 7.3 · पुस्तक पृ. 909, 910
भावार्थ
मूल पाठ के बादखबर सुनते ही सब माताएँ उठ दौड़ीं। भरतजीने प्रभुकी कुशल कहकर सबको समझाया। नगरनिवासियोंने यह समाचार पाया, तो स्त्री-पुरुष सभी हर्षित होकर दौड़े॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 909 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनत सकल जननीं उठि धाईं। कहि प्रभु कुसल भरत समुझाई।।
English explanation
On hearing this, all the mothers rose and hurried forth; Bharata reassured them by telling them of the Lord’s well-being.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | upon hearing |
| सकल | सभी | all |
| जननीं | माताएँ | mothers |
| उठि | उठकर | rising |
| धाईं | दौड़ीं | hurried forth |
| कहि | कहकर | by telling |
| प्रभु | प्रभु राम की | of Lord Rama |
| कुसल | कुशलता | well-being |
| भरत | भरत ने | Bharata |
| समुझाई | समझाकर आश्वस्त किया | explained and reassured them |
2 समाचार पुरबासिन्ह पाए। नर अरु नारि हरषि सब धाए।।
English explanation
The townspeople received the news; all the men and women rushed forth joyfully.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समाचार | समाचार | the news |
| पुरबासिन्ह | नगरवासियों ने | the townspeople |
| पाए | प्राप्त किए | received |
| नर | पुरुष | men |
| अरु | और | and |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| हरषि | प्रसन्न होकर | joyfully |
| सब | सब | all |
| धाए | दौड़ पड़े | rushed forth |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 909
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 909, 910
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।