उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनत बचन जहँ तहँ जन धाए। सुग्रीवादि तुरत अन्हवाए।।
मूल पाठ
सुनत बचन जहँ तहँ जन धाए। सुग्रीवादि तुरत अन्हवाए।।
पुनि करुनानिधि भरतु हँकारे। निज कर राम जटा निरुआरे।।
स्रोत अभिलेख 7.11 · पुस्तक पृ. 918, 918
भावार्थ
मूल पाठ के बादभगवान्के वचन सुनते ही सेवक जहाँ-तहाँ दौड़े और तुरंत ही उन्होंने सुग्रीवादिको स्नान कराया। फिर करुणानिधान श्रीरामजीने भरतजीको बुलाया और उनकी जटाओंको अपने हाथोंसे सुलझाया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 918 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनत बचन जहँ तहँ जन धाए। सुग्रीवादि तुरत अन्हवाए।।
English explanation
On hearing these words, the attendants hurried here and there and promptly bathed Sugriva and the others.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| बचन | वचन | the words |
| जहँ | जहाँ | where |
| तहँ | तहाँ | there |
| जन | सेवक | attendants |
| धाए | दौड़े | hurried |
| सुग्रीवादि | सुग्रीव और अन्य साथियों को | Sugriva, the monkey king, and the others |
| तुरत | तुरंत | at once |
| अन्हवाए | स्नान कराया | had them bathed |
2 पुनि करुनानिधि भरतु हँकारे। निज कर राम जटा निरुआरे।।
English explanation
Then Rama, the embodiment of compassion, called Bharata and untangled his matted hair with his own hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| करुनानिधि | करुणा के भंडार राम ने | Rama, the embodiment of compassion |
| भरतु | भरत को | Bharata, Rama’s brother |
| हँकारे | बुलाया | called |
| निज | अपने | his own |
| कर | हाथों से | with his hands |
| राम | राम ने | Rama |
| जटा | भरत की जटाएँ | Bharata’s matted locks |
| निरुआरे | सुलझाईं | untangled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 918
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 918, 918
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