उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अन्हवाए प्रभु तीनिउ भाई। भगत बछल कृपाल रघुराई।।
मूल पाठ
अन्हवाए प्रभु तीनिउ भाई। भगत बछल कृपाल रघुराई।।
भरत भाग्य प्रभु कोमलताई। सेष कोटि सत सकहिं न गाई।।
स्रोत अभिलेख 7.11 · पुस्तक पृ. 918, 918
भावार्थ
मूल पाठ के बादतदनन्तर भक्तवत्सल कृपालु प्रभु श्रीरघुनाथजीने तीनों भाइयोंको स्नान कराया। भरतजीका भाग्य और प्रभुकी कोमलताका वर्णन अरबों शेषजी भी नहीं कर सकते॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 918 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अन्हवाए प्रभु तीनिउ भाई। भगत बछल कृपाल रघुराई।।
English explanation
The compassionate Lord Rama, loving toward his devotees, had all three brothers bathed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अन्हवाए | स्नान कराया | had them bathed |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| तीनिउ | तीनों | all three |
| भाई | भाइयों को | brothers |
| भगत | भक्तों के प्रति | toward devotees |
| बछल | स्नेहशील | loving |
| कृपाल | दयालु | compassionate |
| रघुराई | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
2 भरत भाग्य प्रभु कोमलताई। सेष कोटि सत सकहिं न गाई।।
English explanation
Even a billion Sheshas could not adequately sing of Bharata’s good fortune and the Lord’s tenderness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत का | Bharata’s |
| भाग्य | सौभाग्य | good fortune |
| प्रभु | प्रभु राम की | Lord Rama’s |
| कोमलताई | कोमलता | tenderness |
| सेष | शेषनाग | Shesha, the many-headed serpent |
| कोटि | करोड़ | ten million |
| सत | सौ | one hundred |
| सकहिं | सकते हैं | can |
| न | नहीं | not |
| गाई | गान कर | sing of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 918
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 918, 918
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।