उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि निज जटा राम बिबराए। गुर अनुसासन मागि नहाए।।
मूल पाठ
पुनि निज जटा राम बिबराए। गुर अनुसासन मागि नहाए।।
करि मज्जन प्रभु भूषन साजे। अंग अनंग देखि सत लाजे।।
स्रोत अभिलेख 7.11 · पुस्तक पृ. 918, 918
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर श्रीरामजीने अपनी जटाएँ खोलीं और गुरुजीकी आज्ञा माँगकर स्नान किया। स्नान करके प्रभुने आभूषण धारण किये। उनके [सुशोभित] अङ्गोंको देखकर सैकड़ों (असंख्य) कामदेव लजा गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 918 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पुनि निज जटा राम बिबराए। गुर अनुसासन मागि नहाए।।
English explanation
Then Rama loosened his own matted locks and, after seeking his guru’s permission, bathed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| निज | अपनी | his own |
| जटा | जटाएँ | matted locks |
| राम | राम ने | Rama |
| बिबराए | खोलीं और सुलझाईं | loosened and untangled |
| गुर | गुरु की | his guru’s |
| अनुसासन | आज्ञा | permission |
| मागि | माँगकर | having sought |
| नहाए | स्नान किया | bathed |
2 करि मज्जन प्रभु भूषन साजे। अंग अनंग देखि सत लाजे।।
English explanation
After bathing, the Lord put on ornaments. Seeing the beauty of his limbs, even a hundred gods of love were put to shame.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having performed |
| मज्जन | स्नान | bathing |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| साजे | धारण किए | put on |
| अंग | प्रभु के अंगों को | the Lord’s limbs |
| अनंग | कामदेव | gods of love |
| देखि | देखकर | on seeing |
| सत | सौ | one hundred |
| लाजे | लज्जित हुए | were put to shame |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 918
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 918, 918
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