उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अवधपुरी अति रुचिर बनाई। देवन्ह सुमन बृष्टि झरि लाई।।
मूल पाठ
अवधपुरी अति रुचिर बनाई। देवन्ह सुमन बृष्टि झरि लाई।।
राम कहा सेवकन्ह बुलाई। प्रथम सखन्ह अन्हवावहु जाई।।
स्रोत अभिलेख 7.11 · पुस्तक पृ. 918, 918
भावार्थ
मूल पाठ के बादअवधपुरी बहुत ही सुन्दर सजायी गयी। देवताओंने पुष्पोंकी वर्षाकी झड़ी लगा दी। श्रीरामचन्द्रजीने सेवकोंको बुलाकर कहा कि तुमलोग जाकर पहले मेरे सखाओंको स्नान कराओ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 918 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अवधपुरी अति रुचिर बनाई। देवन्ह सुमन बृष्टि झरि लाई।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Ayodhya was adorned most beautifully. The gods sent down a shower of flowers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवधपुरी | अयोध्या नगरी | the city of Ayodhya |
| अति | अत्यंत | very |
| रुचिर | सुंदर | beautiful |
| बनाई | सजाई गई | was adorned |
| देवन्ह | देवताओं ने | the gods |
| सुमन | फूलों की | of flowers |
| बृष्टि | वर्षा | rain |
| झरि | झड़ी | a continuous shower |
| लाई | लगा दी | sent down |
2 राम कहा सेवकन्ह बुलाई। प्रथम सखन्ह अन्हवावहु जाई।।
English explanation
Rama called the attendants and said, ‘Go and first bathe my friends.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम ने | Rama |
| कहा | कहा | said |
| सेवकन्ह | सेवकों को | the attendants |
| बुलाई | बुलाकर | having called |
| प्रथम | पहले | first |
| सखन्ह | मित्रों को | the friends |
| अन्हवावहु | स्नान कराओ | have them bathed |
| जाई | जाकर | go and |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 918
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 918, 918
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।