उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीता रघुपति मिलन बहोरी। सुरन्ह कीन्ह अस्तुति कर जोरी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दफिर सीताजी और श्रीरघुनाथजीका मिलाप कहा। जिस प्रकार देवताओंने हाथ जोड़कर स्तुति की और फिर जैसे वानरोंसमेत पुष्पकविमानपर चढ़कर कृपाधाम प्रभु अवधपुरीको चले, वह कहा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 971 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सीता रघुपति मिलन बहोरी। सुरन्ह कीन्ह अस्तुति कर जोरी।।
पुनि पुष्पक चढ़ि कपिन्ह समेता। अवध चले प्रभु कृपा निकेता।।
स्रोत अभिलेख 7.68 · पुस्तक पृ. 971, 972
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सीता रघुपति मिलन बहोरी। सुरन्ह कीन्ह अस्तुति कर जोरी।।
English explanation
Then he recounted Sita’s reunion with Rama; the gods offered praise with folded hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीता | श्रीराम की पत्नी सीता | Sita, Rama’s wife |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी श्रीराम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| मिलन | मिलना; पुनर्मिलन | meeting; reunion |
| बहोरी | फिर | then; again |
| सुरन्ह | देवताओं ने | the gods |
| कीन्ह | की | performed; offered |
| अस्तुति | स्तुति | praise |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | having folded together |
2 पुनि पुष्पक चढ़ि कपिन्ह समेता। अवध चले प्रभु कृपा निकेता।।
English explanation
Then Lord Rama, the abode of compassion, boarded the Pushpaka aerial vehicle with the monkeys and departed for Ayodhya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| पुष्पक | पुष्पक विमान | the Pushpaka aerial vehicle |
| चढ़ि | चढ़कर | having boarded |
| कपिन्ह | वानरों के | the monkeys |
| समेता | सहित | together with |
| अवध | अयोध्या की ओर | toward Ayodhya |
| चले | चले; प्रस्थान किया | departed |
| प्रभु | प्रभु श्रीराम | Lord Rama |
| कृपा | करुणा | compassion |
| निकेता | धाम; निवास | abode |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.68
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 971
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 971, 972
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।