उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सिव अज पूज्य चरन रघुराई। मो पर कृपा परम मृदुलाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजिन श्रीरघुनाथजीके चरण शिवजी और ब्रह्माजीके द्वारा पूज्य हैं, उनकी मुझपर कृपा होनी उनकी परम कोमलता है। किसीका ऐसा स्वभाव कहीं न सुनता हूँ, न देखता हूँ। अत: हे पक्षिराज गरुडज़ी! मैं श्रीरघुनाथजीके समान किसे गिनूँ (समझूँ)?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1039 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सिव अज पूज्य चरन रघुराई। मो पर कृपा परम मृदुलाई।।
अस सुभाउ कहुँ सुनउँ न देखउँ। केहि खगेस रघुपति सम लेखउँ।।
स्रोत अभिलेख 7.124 · पुस्तक पृ. 1039, 1039
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सिव अज पूज्य चरन रघुराई। मो पर कृपा परम मृदुलाई।।
English explanation
Rama’s feet are worthy of worship by Shiva and Brahma, yet his grace toward me is exceedingly tender.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिव | भगवान शिव | Shiva |
| अज | ब्रह्मा, सृष्टिकर्ता | Brahma, the creator |
| पूज्य | पूजनीय | worthy of worship |
| चरन | चरण | feet |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी राम के | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| मो | मुझ | me |
| पर | पर | toward |
| कृपा | अनुग्रह | grace |
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| मृदुलाई | कोमलता; स्नेहमय मृदुता | tenderness; loving gentleness |
2 अस सुभाउ कहुँ सुनउँ न देखउँ। केहि खगेस रघुपति सम लेखउँ।।
English explanation
Nowhere do I hear of or see such a nature. O Garuda, king of birds, whom could I regard as equal to Rama?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | such |
| सुभाउ | स्वभाव | nature; disposition |
| कहुँ | कहीं | anywhere |
| सुनउँ | मैं सुनता हूँ | I hear |
| न | नहीं | not |
| देखउँ | मैं देखता हूँ | I see |
| केहि | किसे | whom |
| खगेस | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| सम | के समान | equal to |
| लेखउँ | मैं मानूँ; गिनूँ | could I regard; reckon |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.124
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1039
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1039, 1039
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।