उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुमिरि राम के गुन गन नाना। पुनि पुनि हरष भुसुंडि सुजाना।।
मूल पाठ
सुमिरि राम के गुन गन नाना। पुनि पुनि हरष भुसुंडि सुजाना।।
महिमा निगम नेति करि गाई। अतुलित बल प्रताप प्रभुताई।।
स्रोत अभिलेख 7.124 · पुस्तक पृ. 1039, 1039
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजीके बहुत-से गुणसमूहोंका स्मरण कर-करके सुजान भुशुण्डिजी बार-बार हर्षित हो रहे हैं। जिनकी महिमा वेदोंने 'नेति-नेति कहकर गायी है; जिनका बल, प्रताप और प्रभुत्व (सामथ्र्य) अतुलनीय है;॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1039 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुमिरि राम के गुन गन नाना। पुनि पुनि हरष भुसुंडि सुजाना।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: Remembering Rama’s many manifold virtues, wise Kakabhushundi rejoiced again and again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमिरि | स्मरण करके | having remembered |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| के | के | of |
| गुन | गुण | virtues |
| गन | समूह | multitudes |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| हरष | हर्षित हुए | rejoiced |
| भुसुंडि | काकभुशुंडि, कौए के रूप में रामभक्त वक्ता | Kakabhushundi, the crow-sage devoted to Rama |
| सुजाना | सुजान; विवेकशील | wise and discerning |
2 महिमा निगम नेति करि गाई। अतुलित बल प्रताप प्रभुताई।।
English explanation
The Vedas sing his glory by declaring ‘not this’—beyond exhaustive description; his strength, majesty, and sovereignty are incomparable.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महिमा | महिमा | glory |
| निगम | वेदों ने | the Vedas |
| नेति | ‘यह नहीं’; वर्णन की सीमा से परे | ‘not this’; beyond exhaustive description |
| करि | कहकर | by declaring |
| गाई | गाई; स्तुति की | sang; praised |
| अतुलित | जिसकी तुलना नहीं हो सकती | incomparable |
| बल | शक्ति | strength |
| प्रताप | तेज और प्रभाव | majesty and might |
| प्रभुताई | प्रभुता; सर्वोच्च अधिकार | sovereignty; lordship |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.124
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1039
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1039, 1039
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।