उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
साधक सिद्ध बिमुक्त उदासी। कबि कोबिद कृतग्य संन्यासी।।
मूल पाठ
साधक सिद्ध बिमुक्त उदासी। कबि कोबिद कृतग्य संन्यासी।।
जोगी सूर सुतापस ग्यानी। धर्म निरत पंडित बिग्यानी।।
स्रोत अभिलेख 7.124 · पुस्तक पृ. 1039, 1039
भावार्थ
मूल पाठ के बादसाधक, सिद्ध, जीवन्मुक्त, उदासीन (विरक्त), कवि, विद्वान्, कर्म [रहस्य] के ज्ञाता, संन्यासी, योगी, शूरवीर, बड़े तपस्वी, ज्ञानी, धर्मपरायण, पण्डित और विज्ञानी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1039 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 साधक सिद्ध बिमुक्त उदासी। कबि कोबिद कृतग्य संन्यासी।।
English explanation
Spiritual seekers, accomplished adepts, liberated and detached people; poets, learned people, the grateful, and renunciants—the list continues in the next line.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| साधक | आध्यात्मिक साधना करने वाले | spiritual practitioners |
| सिद्ध | साधना में सिद्धि प्राप्त जन | accomplished spiritual adepts |
| बिमुक्त | बंधन से मुक्त जन | those freed from bondage |
| उदासी | संसार से विरक्त जन | those detached from worldly life |
| कबि | कवि | poets |
| कोबिद | विद्वान; विषयों के जानकार | learned and knowledgeable people |
| कृतग्य | उपकार मानने वाले; कृतज्ञ | grateful people |
| संन्यासी | संसार का त्याग करने वाले | renunciants |
2 जोगी सूर सुतापस ग्यानी। धर्म निरत पंडित बिग्यानी।।
English explanation
Yogis, heroes, excellent ascetics, the wise, those devoted to righteousness, scholars, and those with realized knowledge—the statement about all these follows in the next line.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोगी | योग-साधना करने वाले | practitioners of yoga |
| सूर | वीर; शूरवीर | heroes; the valiant |
| सुतापस | श्रेष्ठ तपस्वी | excellent ascetics |
| ग्यानी | ज्ञानवान जन | the wise |
| धर्म | धर्म; सदाचार | righteousness; religious duty |
| निरत | में लगे हुए | devoted to |
| पंडित | शास्त्रों के विद्वान | scholars of scripture |
| बिग्यानी | विशेष या अनुभूत ज्ञान वाले | those with deeper or realized knowledge |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.124
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1039
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1039, 1039
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।