उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तरहिं न बिनु सेएँ मम स्वामी। राम नमामि नमामि नमामी।।
मूल पाठ
तरहिं न बिनु सेएँ मम स्वामी। राम नमामि नमामि नमामी।।
सरन गएँ मो से अघ रासी। होहिं सुद्ध नमामि अबिनासी।।
स्रोत अभिलेख 7.124 · पुस्तक पृ. 1039, 1039
भावार्थ
मूल पाठ के बादये कोई भी मेरे स्वामी श्रीरामजीका सेवन (भजन) किये बिना नहीं तर सकते। मैं उन्हीं श्रीरामजीको बार-बार नमस्कार करता हूँ। जिनकी शरण जानेपर मुझ-जैसे पापराशि भी शुद्ध (पापरहित) हो जाते हैं, उन अविनाशी श्रीरामजीको मैं नमस्कार करता हूँ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1039 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तरहिं न बिनु सेएँ मम स्वामी। राम नमामि नमामि नमामी।।
English explanation
None of these cross the ocean of worldly existence without serving my Lord. O Rama, I bow to you, I bow to you, I bow to you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तरहिं | पार होते हैं | cross over worldly existence |
| न | नहीं | not |
| बिनु | बिना | without |
| सेएँ | सेवा किए | serving |
| मम | मेरे | my |
| स्वामी | स्वामी; प्रभु | Lord; master |
| राम | हे राम | O Rama |
| नमामि | मैं नमस्कार करता हूँ | I bow to you |
| नमामि | मैं नमस्कार करता हूँ | I bow to you |
| नमामी | मैं नमस्कार करता हूँ | I bow to you |
2 सरन गएँ मो से अघ रासी। होहिं सुद्ध नमामि अबिनासी।।
English explanation
On taking refuge in him, even heaps of sin like me become pure. I bow to the imperishable Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सरन | शरण में | into refuge |
| गएँ | जाने पर | upon going; upon taking refuge |
| मो | मुझ | me |
| से | जैसे | like |
| अघ | पापों की | of sins |
| रासी | राशियाँ; ढेर | heaps; masses |
| होहिं | हो जाते हैं | become |
| सुद्ध | शुद्ध; पवित्र | pure; purified |
| नमामि | मैं नमस्कार करता हूँ | I bow to you |
| अबिनासी | अविनाशी प्रभु को | to the imperishable Lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.124
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1039
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1039, 1039
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।