उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सासुन्ह सबनि मिली बैदेही। चरनन्हि लागि हरषु अति तेही।।
मूल पाठ
सासुन्ह सबनि मिली बैदेही। चरनन्हि लागि हरषु अति तेही।।
देहिं असीस बूझि कुसलाता। होइ अचल तुम्हार अहिवाता।।
स्रोत अभिलेख 7.7 · पुस्तक पृ. 914, 915
भावार्थ
मूल पाठ के बादजानकीजी सब सासुओंसे मिलीं और उनके चरणों लगकर उन्हें अत्यन्त हर्ष हुआ। सासुएँ कुशल पूछकर आशिष दे रही हैं कि तुम्हारा सुहाग अचल हो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 914 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सासुन्ह सबनि मिली बैदेही। चरनन्हि लागि हरषु अति तेही।।
English explanation
Sita met all her mothers-in-law and bowed at their feet; she felt great joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सासुन्ह | सासों से | with her mothers-in-law |
| सबनि | सभी | all |
| मिली | मिलीं | met |
| बैदेही | विदेह की पुत्री सीता | Sita, daughter of the king of Videha |
| चरनन्हि | चरणों में | at their feet |
| लागि | लगकर प्रणाम किया | bowed in reverence |
| हरषु | आनंद | joy |
| अति | बहुत | great |
| तेही | उन्हें, सीता को | to her, Sita |
2 देहिं असीस बूझि कुसलाता। होइ अचल तुम्हार अहिवाता।।
English explanation
Her mothers-in-law ask after her well-being and bless her: May your married good fortune endure forever.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देहिं | देती हैं | give |
| असीस | आशीर्वाद | blessings |
| बूझि | पूछकर | having asked |
| कुसलाता | कुशल-क्षेम | well-being |
| होइ | हो जाए; बना रहे | may it be; may it remain |
| अचल | अटल, स्थायी | unshaken, enduring |
| तुम्हार | तुम्हारा | your |
| अहिवाता | सुहाग, पति के जीवित रहने का सौभाग्य | marital good fortune, with one's husband living |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 914
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 914, 915
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