उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब रघुपति मुख कमल बिलोकहिं। मंगल जानि नयन जल रोकहिं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसब माताएँ श्रीरघुनाथजीका कमल-सा मुखड़ा देख रही हैं। [नेत्रोंसे प्रेमके आँसू उमड़े आते हैं, परन्तु] मङ्गलका समय जानकर वे आँसुओंके जलको नेत्रोंमें ही रोक रखती हैं। सोनेके थालसे आरती उतारती हैं और बार-बार प्रभुके श्रीअङ्गोंकी ओर देखती हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 914 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सब रघुपति मुख कमल बिलोकहिं। मंगल जानि नयन जल रोकहिं।।
कनक थार आरति उतारहिं। बार बार प्रभु गात निहारहिं।।
स्रोत अभिलेख 7.7 · पुस्तक पृ. 914, 915
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सब रघुपति मुख कमल बिलोकहिं। मंगल जानि नयन जल रोकहिं।।
English explanation
All gaze at Rama's lotus-like face and, recognizing the auspicious occasion, hold back their tears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम का | of Rama, lord of the Raghu lineage |
| मुख | मुख | face |
| कमल | कमल-समान | lotus-like |
| बिलोकहिं | देखते हैं | gaze upon |
| मंगल | शुभ अवसर | an auspicious occasion |
| जानि | समझकर | recognizing |
| नयन | आँखों का | of the eyes |
| जल | जल, आँसू | water, tears |
| रोकहिं | रोकते हैं | hold back |
2 कनक थार आरति उतारहिं। बार बार प्रभु गात निहारहिं।।
English explanation
They perform the welcoming arati with golden trays and gaze repeatedly at Lord Rama's form.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कनक | सोने की | golden |
| थार | थालें | trays |
| आरति | आरती, दीप से स्वागत-पूजन | arati, ceremonial worship with lamps |
| उतारहिं | आरती करती हैं | perform the arati |
| बार | बार | time |
| बार | बार; फिर-फिर | after time; repeatedly |
| प्रभु | प्रभु राम का | of Lord Rama |
| गात | शरीर, देह | body, form |
| निहारहिं | ध्यान से देखती हैं | gaze upon |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 914
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 914, 915
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।