उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सागर निज मरजादाँ रहहीं। डारहिं रत्न तटन्हि नर लहहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसमुद्र अपनी मर्यादामें रहते हैं। वे लहरोंके द्वारा किनारोंपर रत्न डाल देते हैं, जिन्हें मनुष्य पा जाते हैं। सब तालाब कमलोंसे परिपूर्ण हैं। दसों दिशाओंके विभाग (अर्थात् सभी प्रदेश) अत्यन्त प्रसन्न हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 933 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सागर निज मरजादाँ रहहीं। डारहिं रत्न तटन्हि नर लहहीं।।
सरसिज संकुल सकल तड़ागा। अति प्रसन्न दस दिसा बिभागा।।
स्रोत अभिलेख 7.23 · पुस्तक पृ. 932, 933
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सागर निज मरजादाँ रहहीं। डारहिं रत्न तटन्हि नर लहहीं।।
English explanation
The seas stay within their bounds. They cast gems upon the shores, where people obtain them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सागर | समुद्र | seas |
| निज | अपनी | their own |
| मरजादाँ | सीमा में | within their bounds |
| रहहीं | रहते हैं | remain |
| डारहिं | डालते हैं | cast or deposit |
| रत्न | रत्न | gems |
| तटन्हि | तटों पर | on the shores |
| नर | मनुष्य | people |
| लहहीं | प्राप्त करते हैं | obtain |
2 सरसिज संकुल सकल तड़ागा। अति प्रसन्न दस दिसा बिभागा।।
English explanation
All ponds are filled with lotuses. The regions of all ten directions are wonderfully clear and cheerful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सरसिज | कमल | lotuses |
| संकुल | भरे हुए | filled with |
| सकल | सभी | all |
| तड़ागा | तालाब | ponds |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| प्रसन्न | निर्मल, प्रसन्न | clear and cheerful |
| दस | दसों | all ten |
| दिसा | दिशाएँ | directions |
| बिभागा | प्रदेश, क्षेत्र | regions |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 933
- सहायक विषय
- रामराज्यका वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 932, 933
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।