उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब सुख खानि भगति तैं मागी। नहिं जग कोउ तोहि सम बड़भागी।।
मूल पाठ
सब सुख खानि भगति तैं मागी। नहिं जग कोउ तोहि सम बड़भागी।।
जो मुनि कोटि जतन नहिं लहहीं। जे जप जोग अनल तन दहहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.85 · पुस्तक पृ. 987, 987
भावार्थ
मूल पाठ के बादतूने सब सुखोंकी खान भक्ति माँग ली, जगत्में तेरे समान बड़भागी कोई नहीं है। वे मुनि जो जप और योगकी अग्रिसे शरीर जलाते रहते हैं, करोड़ों यत्न करके भी जिसको (जिस भक्तिको) नहीं पाते॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 987 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1सब सुख खानि भगति तैं मागी। नहिं जग कोउ तोहि सम बड़भागी।।
English explanation
You have asked for devotion, the source of all happiness; no one in the world is as fortunate as you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| सुख | सुखों की | of happiness |
| खानि | खान, भंडार | mine, abundant source |
| भगति | भक्ति | devotion |
| तैं | तुमने | you |
| मागी | माँगी | asked for |
| नहिं | नहीं है | there is not |
| जग | संसार में | in the world |
| कोउ | कोई | anyone |
| तोहि | तुम्हारे | you |
| सम | समान | equal to |
| बड़भागी | अत्यंत भाग्यशाली | greatly fortunate |
2 जो मुनि कोटि जतन नहिं लहहीं। जे जप जोग अनल तन दहहीं।।
English explanation
That devotion eludes sages despite countless efforts, even though they burn their bodies in the fire of recitation and yogic practice.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जिस भक्ति को | which devotion |
| मुनि | मुनि, तपस्वी | sages, ascetics |
| कोटि | करोड़ों | countless; tens of millions of |
| जतन | प्रयत्नों से | through efforts |
| नहिं | नहीं | not |
| लहहीं | प्राप्त करते | attain |
| जे | जो मुनि | who, those sages |
| जप | मंत्र-जप | repeated sacred recitation |
| जोग | योग-साधना | yogic practice |
| अनल | अग्नि में | in the fire |
| तन | शरीर | their bodies |
| दहहीं | जलाते, तपाते हैं | burn, subject to austerity |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.85
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 987
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 987, 987
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।