उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रीझेउँ देखि तोरि चतुराई। मागेहु भगति मोहि अति भाई।।
मूल पाठ
रीझेउँ देखि तोरि चतुराई। मागेहु भगति मोहि अति भाई।।
सुनु बिहंग प्रसाद अब मोरें। सब सुभ गुन बसिहहिं उर तोरें।।
स्रोत अभिलेख 7.85 · पुस्तक पृ. 987, 987
भावार्थ
मूल पाठ के बादवही भक्ति तूने माँगी। तेरी चतुरता देखकर मैं रीझ गया। यह चतुरता मुझे बहुत ही अच्छी लगी। हे पक्षी! सुन, मेरी कृपासे अब समस्त शुभ गुण तेरे हृदयमें बसेंगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 987 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1रीझेउँ देखि तोरि चतुराई। मागेहु भगति मोहि अति भाई।।
English explanation
Seeing your discernment, I was delighted; your asking for devotion pleased me greatly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रीझेउँ | मैं प्रसन्न हुआ | I was delighted |
| देखि | देखकर | seeing |
| तोरि | तुम्हारी | your |
| चतुराई | चतुराई, विवेक | wisdom, discernment |
| मागेहु | तुमने माँगी | you asked for |
| भगति | भक्ति | devotion |
| मोहि | मुझे | to me |
| अति | बहुत | greatly |
| भाई | अच्छी लगी | was pleasing |
2 सुनु बिहंग प्रसाद अब मोरें। सब सुभ गुन बसिहहिं उर तोरें।।
English explanation
Listen, O bird! Now, through my grace, all good qualities will dwell in your heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| बिहंग | हे पक्षी, काकभुशुंडि | O bird, Kakabhushundi |
| प्रसाद | कृपा से | through grace |
| अब | अब | now |
| मोरें | मेरी | my |
| सब | सभी | all |
| सुभ | शुभ, अच्छे | good, auspicious |
| गुन | गुण | qualities |
| बसिहहिं | बसेंगे | will dwell |
| उर | हृदय में | in the heart |
| तोरें | तुम्हारे | your |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.85
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 987
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 987, 987
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