उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भगति ग्यान बिग्यान बिरागा। जोग चरित्र रहस्य बिभागा।।
मूल पाठ
भगति ग्यान बिग्यान बिरागा। जोग चरित्र रहस्य बिभागा।।
जानब तैं सबही कर भेदा। मम प्रसाद नहिं साधन खेदा।।
स्रोत अभिलेख 7.85 · पुस्तक पृ. 987, 987
भावार्थ
मूल पाठ के बादभक्ति, ज्ञान, विज्ञान, वैराग्य, योग, मेरी लीलाएँ और उनके रहस्य तथा विभाग—इन सबके भेदको तू मेरी कृपासे ही जान जायगा। तुझे साधनका कष्ट नहीं होगा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 987 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1भगति ग्यान बिग्यान बिरागा। जोग चरित्र रहस्य बिभागा।।
English explanation
Devotion, knowledge, realized understanding, detachment, yoga, deeds, mysteries, and their various divisions—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगति | भक्ति | devotion |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| बिग्यान | अनुभव से प्राप्त ज्ञान | realized, experiential knowledge |
| बिरागा | वैराग्य, आसक्ति का अभाव | detachment, freedom from attachment |
| जोग | योग | yoga, spiritual discipline |
| चरित्र | चरित्र, लीलात्मक कर्म | deeds, divine acts |
| रहस्य | गूढ़ तत्त्व | mysteries, hidden truths |
| बिभागा | विभाग, विविध भेद | divisions, distinctions |
2 जानब तैं सबही कर भेदा। मम प्रसाद नहिं साधन खेदा।।
English explanation
You will understand the distinctions of all these through my grace, without the hardship of spiritual practice.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानब | जानोगे | will know |
| तैं | तुम | you |
| सबही | इन सभी | all these |
| कर | के | of |
| भेदा | भेद, सूक्ष्म distinctions | distinctions, subtleties |
| मम | मेरी | my |
| प्रसाद | कृपा से | through grace |
| नहिं | नहीं होगा | there will be no |
| साधन | साधना का | of spiritual practice |
| खेदा | कष्ट, श्रम | hardship, toil |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.85
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 987
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 987, 987
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।