उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एवमस्तु कहि रघुकुलनायक। बोले बचन परम सुखदायक।।
मूल पाठ
एवमस्तु कहि रघुकुलनायक। बोले बचन परम सुखदायक।।
सुनु बायस तैं सहज सयाना। काहे न मागसि अस बरदाना।।
स्रोत अभिलेख 7.85 · पुस्तक पृ. 987, 987
भावार्थ
मूल पाठ के बाद'एवमस्तु (ऐसा ही हो) कहकर रघुवंशके स्वामी परम सुख देनेवाले वचन बोले—हे काक! सुन, तू स्वभावसे ही बुद्धिमान् है। ऐसा वरदान कैसे न माँगता?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 987 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1एवमस्तु कहि रघुकुलनायक। बोले बचन परम सुखदायक।।
English explanation
Saying, “So be it,” Rama, the leader of Raghu’s lineage, spoke words that brought supreme joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एवमस्तु | ऐसा ही हो | so be it |
| कहि | कहकर | having said |
| रघुकुलनायक | रघुकुल के नायक श्रीराम | Rama, leader of Raghu’s lineage |
| बोले | बोले | spoke |
| बचन | वचन | words |
| परम | अत्यंत | supremely |
| सुखदायक | सुख देने वाले | joy-giving |
2 सुनु बायस तैं सहज सयाना। काहे न मागसि अस बरदाना।।
English explanation
Listen, O crow, Kakabhushundi! You are naturally wise; why would you not ask for such a boon?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| बायस | हे कौए, काकभुशुंडि | O crow, Kakabhushundi |
| तैं | तुम | you |
| सहज | स्वभाव से ही | by nature |
| सयाना | बुद्धिमान | wise |
| काहे | क्यों | why |
| न | नहीं | not |
| मागसि | तुम माँगते | would you ask |
| अस | ऐसा | such |
| बरदाना | वरदान | a boon |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.85
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 987
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 987, 987
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