उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब मम प्रिय नहिं तुम्हहि समाना। मृषा न कहउँ मोर यह बाना।।
मूल पाठ
सब मम प्रिय नहिं तुम्हहि समाना। मृषा न कहउँ मोर यह बाना।।
सब के प्रिय सेवक यह नीती। मोरें अधिक दास पर प्रीती।।
स्रोत अभिलेख 7.16 · पुस्तक पृ. 926, 926
भावार्थ
मूल पाठ के बादये सभी मुझे प्रिय हैं, परंतु तुम्हारे समान नहीं। मैं झूठ नहीं कहता, यह मेरा स्वभाव है। सेवक सभीको प्यारे लगते हैं, यह नीति (नियम) है। [पर] मेरा तो दासपर [स्वाभाविक ही] विशेष प्रेम है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 926 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सब मम प्रिय नहिं तुम्हहि समाना। मृषा न कहउँ मोर यह बाना।।
English explanation
All these are dear to me, but not as dear as you. I do not speak falsely; this is my way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | ये सब | all these |
| मम | मुझे | to me |
| प्रिय | प्रिय हैं | are dear |
| नहिं | नहीं | not |
| तुम्हहि | तुम सबके | to you all |
| समाना | समान | equal in dearness |
| मृषा | झूठ | falsely |
| न | नहीं | not |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I speak |
| मोर | मेरा | my |
| यह | यह | this |
| बाना | स्वभाव; रीति | habit; way |
2 सब के प्रिय सेवक यह नीती। मोरें अधिक दास पर प्रीती।।
English explanation
Servants are dear to everyone—this is the general rule. But my affection for my servants is greater.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सबके | everyone |
| के | को; के लिए | to |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| सेवक | सेवक | servants |
| यह | यह | this |
| नीती | सामान्य रीति | general rule |
| मोरें | मेरे यहाँ; मेरा | in my case; my |
| अधिक | अधिक | greater |
| दास | सेवकों | servants |
| पर | के प्रति | toward |
| प्रीती | प्रेम | affection |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 926
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 926, 926
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