उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ताते मोहि तुम्ह अति प्रिय लागे। मम हित लागि भवन सुख त्यागे।।
मूल पाठ
ताते मोहि तुम्ह अति प्रिय लागे। मम हित लागि भवन सुख त्यागे।।
अनुज राज संपति बैदेही। देह गेह परिवार सनेही।।
स्रोत अभिलेख 7.16 · पुस्तक पृ. 926, 926
भावार्थ
मूल पाठ के बादमेरे हितके लिये तुमलोगोंने घरोंको तथा सब प्रकारके सुखोंको त्याग दिया। इससे तुम मुझे अत्यन्त ही प्रिय लग रहे हो। छोटे भाई, राज्य, सम्पत्ति, जानकी, अपना शरीर, घर, कुटुम्ब और मित्र—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 926 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ताते मोहि तुम्ह अति प्रिय लागे। मम हित लागि भवन सुख त्यागे।।
English explanation
That is why you are so dear to me: for my sake, you gave up the comforts of home.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताते | इसीलिए | therefore |
| मोहि | मुझे | to me |
| तुम्ह | तुम सब | you all |
| अति | अत्यंत | very |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| लागे | लगते हो | are felt to be |
| मम | मेरे | my |
| हित | हित | benefit |
| लागि | के लिए | for the sake of |
| भवन | घर के | of home |
| सुख | सुख | comforts |
| त्यागे | त्याग दिए | gave up |
2 अनुज राज संपति बैदेही। देह गेह परिवार सनेही।।
English explanation
My younger brothers, kingdom, wealth, Sita, body, home, family, and loved ones—all these [the statement continues in the next line].
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनुज | छोटे भाई | younger brothers |
| राज | राज्य | kingdom |
| संपति | संपत्ति | wealth |
| बैदेही | विदेह की पुत्री सीता | Sita, daughter of the king of Videha |
| देह | शरीर | body |
| गेह | घर | home |
| परिवार | परिवार | family |
| सनेही | स्नेह रखने वाले प्रियजन | affectionate loved ones |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 926
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 926, 926
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।