उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परम प्रीति समीप बैठारे। भगत सुखद मृदु बचन उचारे।।
मूल पाठ
परम प्रीति समीप बैठारे। भगत सुखद मृदु बचन उचारे।।
तुम्ह अति कीन्ह मोरि सेवकाई। मुख पर केहि बिधि करौं बड़ाई।।
स्रोत अभिलेख 7.16 · पुस्तक पृ. 926, 926
भावार्थ
मूल पाठ के बादबड़े ही प्रेमसे श्रीरामजीने उनको अपने पास बैठाया और भक्तोंको सुख देनेवाले कोमल वचन कहे—तुमलोगोंने मेरी बड़ी सेवा की है। मुँहपर किस प्रकार तुम्हारी बड़ाई करूँ?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 926 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 परम प्रीति समीप बैठारे। भगत सुखद मृदु बचन उचारे।।
English explanation
With the greatest affection, Rama seated them beside him and spoke gentle words that brought joy to his devotees.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परम | अत्यंत | utmost |
| प्रीति | प्रेम से | with affection |
| समीप | अपने पास | beside himself |
| बैठारे | बैठाया | seated them |
| भगत | भक्तों को | to devotees |
| सुखद | सुख देने वाले | bringing joy |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बचन | वचन | words |
| उचारे | कहे | spoke |
2 तुम्ह अति कीन्ह मोरि सेवकाई। मुख पर केहि बिधि करौं बड़ाई।।
English explanation
You have served me so greatly. How can I praise you to your faces?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | तुम सबने | you all |
| अति | बहुत | greatly |
| कीन्ह | की है | have performed |
| मोरि | मेरी | my |
| सेवकाई | सेवा | service |
| मुख | मुख के सामने | to your faces |
| पर | पर; सामने | before; in front of |
| केहि | किस | what |
| बिधि | प्रकार से | way |
| करौं | मैं करूँ | can I offer |
| बड़ाई | प्रशंसा | praise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 926
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 926, 926
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।