उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब निर्दंभ धर्मरत पुनी। नर अरु नारि चतुर सब गुनी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसभी दम्भरहित हैं, धर्मपरायण हैं और पुण्यात्मा हैं। पुरुष और स्त्री सभी चतुर और गुणवान् हैं। सभी गुणोंका आदर करनेवाले और पण्डित हैं तथा सभी ज्ञानी हैं। सभी कृतज्ञ (दूसरेके किये हुए उपकारको माननेवाले) हैं, कपट-चतुराई (धूर्तता) किसीमें नहीं है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 931 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सब निर्दंभ धर्मरत पुनी। नर अरु नारि चतुर सब गुनी।।
सब गुनग्य पंडित सब ग्यानी। सब कृतग्य नहिं कपट सयानी।।
स्रोत अभिलेख 7.21 · पुस्तक पृ. 930, 931
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सब निर्दंभ धर्मरत पुनी। नर अरु नारि चतुर सब गुनी।।
English explanation
All were free from pretension, devoted to righteousness, and virtuous; all men and women were discerning and endowed with good qualities.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| निर्दंभ | दंभ और दिखावे से रहित | free from pretension and hypocrisy |
| धर्मरत | धर्म में तत्पर | devoted to righteousness |
| पुनी | पुण्यात्मा; पवित्र आचरण वाले | virtuous; righteous |
| नर | पुरुष | men |
| अरु | और | and |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| चतुर | समझदार; कुशल | discerning; capable |
| सब | सभी | all |
| गुनी | गुणवान | endowed with good qualities |
2 सब गुनग्य पंडित सब ग्यानी। सब कृतग्य नहिं कपट सयानी।।
English explanation
All appreciated good qualities and were learned and wise; all were grateful, and none was skilled in deceit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| गुनग्य | गुणों को पहचानने वाले | appreciative of good qualities |
| पंडित | विद्वान | learned |
| सब | सभी | all |
| ग्यानी | ज्ञानवान; विवेकी | knowledgeable; wise |
| सब | सभी | all |
| कृतग्य | उपकार मानने वाले; कृतज्ञ | grateful; appreciative of kindness |
| नहिं | नहीं | not; none |
| कपट | छल-कपट में | in deceit |
| सयानी | चतुर; निपुण | clever; skilled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 931
- सहायक विषय
- रामराज्यका वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 930, 931
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।