उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब द्विज देहु हरषि अनुसासन। रामचंद्र बैठहिं सिंघासन।।
मूल पाठ
सब द्विज देहु हरषि अनुसासन। रामचंद्र बैठहिं सिंघासन।।
मुनि बसिष्ट के बचन सुहाए। सुनत सकल बिप्रन्ह अति भाए।।
स्रोत अभिलेख 7.1 · पुस्तक पृ. 917, 917
भावार्थ
मूल पाठ के बादआप सब ब्राह्मण हर्षित होकर आज्ञा दीजिये, जिसमें श्रीरामचन्द्रजी सिंहासनपर विराजमान हों। वसिष्ठ मुनिके सुहावने वचन सुनते ही सब ब्राह्मणोंको बहुत ही अच्छे लगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 917 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सब द्विज देहु हरषि अनुसासन। रामचंद्र बैठहिं सिंघासन।।
English explanation
“All you Brahmins, gladly give your approval for Ramachandra to take his seat on the throne.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| द्विज | हे ब्राह्मणो | you Brahmins |
| देहु | दीजिए | give |
| हरषि | प्रसन्न होकर | gladly |
| अनुसासन | अनुमति या सम्मति | approval or consent |
| रामचंद्र | श्रीराम | Lord Rama |
| बैठहिं | बैठें | may take his seat |
| सिंघासन | राजसिंहासन पर | on the royal throne |
2 मुनि बसिष्ट के बचन सुहाए। सुनत सकल बिप्रन्ह अति भाए।।
English explanation
On hearing sage Vashishtha’s pleasing words, all the Brahmins found them most agreeable.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि | sage |
| बसिष्ट | वसिष्ठ | Vashishtha, the royal preceptor |
| के | के | of |
| बचन | वचन | words |
| सुहाए | सुंदर और प्रिय | pleasing |
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| सकल | सभी | all |
| बिप्रन्ह | ब्राह्मणों को | to the Brahmins |
| अति | बहुत | very much |
| भाए | प्रिय लगे | were agreeable |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 917
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 917, 917
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