उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब के निंदा जे जड़ करहीं। ते चमगादुर होइ अवतरहीं।।
मूल पाठ
सब के निंदा जे जड़ करहीं। ते चमगादुर होइ अवतरहीं।।
सुनहु तात अब मानस रोगा। जिन्ह ते दुख पावहिं सब लोगा।।
स्रोत अभिलेख 7.121 · पुस्तक पृ. 1032, 1035
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो मूर्ख मनुष्य सबकी निन्दा करते हैं, वे चमगादड़ होकर जन्म लेते हैं। हे तात! अब मानस- रोग सुनिये, जिनसे सब लोग दु:ख पाया करते हैं॥ १४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1034 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सब के निंदा जे जड़ करहीं। ते चमगादुर होइ अवतरहीं।।
English explanation
Those fools who slander everyone are born as bats.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सबकी | everyone |
| के | की | of |
| निंदा | निंदा | slander |
| जे | जो | who |
| जड़ | मूर्ख | fools |
| करहीं | करते हैं | do |
| ते | वे | they |
| चमगादुर | चमगादड़ | bats |
| होइ | बनकर | becoming |
| अवतरहीं | जन्म लेते हैं | are born |
2 सुनहु तात अब मानस रोगा। जिन्ह ते दुख पावहिं सब लोगा।।
English explanation
Dear one, now hear about the diseases of the mind, from which all people suffer.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनो | listen |
| तात | हे प्रिय | dear one |
| अब | अब | now |
| मानस | मन के | of the mind |
| रोगा | रोग | diseases |
| जिन्ह | जिनसे | which |
| ते | से | from |
| दुख | दुःख | suffering |
| पावहिं | पाते हैं | experience |
| सब | सब | all |
| लोगा | लोग | people |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.121
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1034
- सहायक विषय
- गरुड़जीके सात प्रश्न तथा काकभुशुण्डिके उत्तर
- मुद्रित पृष्ठ
- 1032, 1035
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।