उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सबके बचन प्रेम रस साने। सुनि रघुनाथ हृदयँ हरषाने।।
मूल पाठ
सबके बचन प्रेम रस साने। सुनि रघुनाथ हृदयँ हरषाने।।
निज निज गृह गए आयसु पाई। बरनत प्रभु बतकही सुहाई।।
स्रोत अभिलेख 7.47 · पुस्तक पृ. 953, 954
भावार्थ
मूल पाठ के बादसबके प्रेमरसमें सने हुए वचन सुनकर श्रीरघुनाथजी हृदयमें हर्षित हुए। फिर आज्ञा पाकर सब प्रभुकी सुन्दर बातचीतका वर्णन करते हुए अपने-अपने घर गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 954 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सबके बचन प्रेम रस साने। सुनि रघुनाथ हृदयँ हरषाने।।
English explanation
Hearing everyone’s words steeped in love, Rama, lord of Raghu’s line, rejoiced in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सबके | सबके | everyone’s |
| बचन | वचन | words |
| प्रेम | प्रेम | love |
| रस | रस में | in the essence |
| साने | भीगे हुए | steeped |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
| हृदयँ | हृदय में | in his heart |
| हरषाने | प्रसन्न हुए | rejoiced |
2 निज निज गृह गए आयसु पाई। बरनत प्रभु बतकही सुहाई।।
English explanation
Having received permission, everyone went to their respective homes, recounting the Lord’s delightful conversation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने-अपने | respective |
| गृह | घर | homes |
| गए | चले गए | went |
| आयसु | आज्ञा | permission |
| पाई | पाकर | having received |
| बरनत | वर्णन करते हुए | recounting |
| प्रभु | प्रभु राम की | of Lord Rama |
| बतकही | बातचीत | conversation |
| सुहाई | सुंदर और प्रिय | delightful |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.47
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 954
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका प्रजाको उपदेश (श्रीरामगीता), पुरवासियोंकी कृतज्ञता
- मुद्रित पृष्ठ
- 953, 954
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