उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सनकादिक बिधि लोक सिधाए। भ्रातन्ह राम चरन सिरु नाए।।
मूल पाठ
सनकादिक बिधि लोक सिधाए। भ्रातन्ह राम चरन सिरु नाए।।
पूछत प्रभुहि सकल सकुचाहीं। चितवहिं सब मारुतसुत पाहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.36 · पुस्तक पृ. 944, 944
भावार्थ
मूल पाठ के बादसनकादि मुनि ब्रह्मलोकको चले गये। तब भाइयोंने श्रीरामजीके चरणोंमें सिर नवाया। सब भाई प्रभुसे पूछते सकुचाते हैं। [इसलिये] सब हनुमान्जीकी ओर देख रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 944 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सनकादिक बिधि लोक सिधाए। भ्रातन्ह राम चरन सिरु नाए।।
English explanation
Sanaka and the other sages departed for Brahma’s realm. The brothers bowed their heads at Rama’s feet. (This is an AI-generated draft interpretation.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सनकादिक | सनक आदि मुनि | Sanaka and the other sages |
| बिधि | ब्रह्मा का | of Brahma |
| लोक | लोक, धाम | realm |
| सिधाए | चले गए | departed |
| भ्रातन्ह | भाइयों ने | the brothers |
| राम | श्रीराम के | of Rama |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| सिरु | सिर | heads |
| नाए | नवाए | bowed |
2 पूछत प्रभुहि सकल सकुचाहीं। चितवहिं सब मारुतसुत पाहीं।।
English explanation
All the brothers hesitated to ask the Lord and looked toward Hanuman, the son of the wind god.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूछत | पूछने में | in asking |
| प्रभुहि | प्रभु राम से | the Lord Rama |
| सकल | सभी भाई | all the brothers |
| सकुचाहीं | संकोच करते हैं | hesitate |
| चितवहिं | देखते हैं | look |
| सब | सब | all |
| मारुतसुत | पवनपुत्र हनुमान | Hanuman, son of the wind god |
| पाहीं | की ओर | toward |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.36
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 944
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 944, 944
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।