उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संत बिसुद्ध मिलहिं परि तेही। चितवहिं राम कृपा करि जेही।।
मूल पाठ
संत बिसुद्ध मिलहिं परि तेही। चितवहिं राम कृपा करि जेही।।
राम कृपाँ तव दरसन भयऊ। तव प्रसाद सब संसय गयऊ।।
स्रोत अभिलेख 7.69 · पुस्तक पृ. 972, 973
भावार्थ
मूल पाठ के बादशुद्ध (सच्चे) संत उसीको मिलते हैं जिसे श्रीरामजी कृपा करके देखते हैं। श्रीरामजीकी कृपासे मुझे आपके दर्शन हुए और आपकी कृपासे मेरा सन्देह चला गया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 973 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 संत बिसुद्ध मिलहिं परि तेही। चितवहिं राम कृपा करि जेही।।
English explanation
Pure saints are met by the person upon whom Rama casts a gracious glance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संत | संत | saints |
| बिसुद्ध | निर्मल | pure |
| मिलहिं | मिलते हैं | are met |
| परि | अवश्य ही; निश्चय ही। | Certainly; assuredly. |
| तेही | उसी को | by that person |
| चितवहिं | दृष्टि डालते हैं | look upon |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| कृपा | कृपा | compassion |
| करि | करके | showing |
| जेही | जिस पर | upon whom |
2 राम कृपाँ तव दरसन भयऊ। तव प्रसाद सब संसय गयऊ।।
English explanation
By Rama’s grace I came to see you; through your favor, all my doubts were dispelled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम की | Rama’s |
| कृपाँ | कृपा से | through grace |
| तव | तुम्हारा | your |
| दरसन | दर्शन | seeing you |
| भयऊ | हुआ | came about |
| तव | तुम्हारे | your |
| प्रसाद | अनुग्रह से | through favor |
| सब | सभी | all |
| संसय | संदेह | doubts |
| गयऊ | दूर हो गए | were dispelled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.69
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 973
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 972, 973
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।