उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
श्रीमुख बचन सुनत सब भाई। हरषे प्रेम न हृदयँ समाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभगवान्के श्रीमुखसे ये वचन सुनकर सब भाई हॢषत हो गये। प्रेम उनके हृदयोंमें समाता नहीं। वे बार-बार बड़ी विनती करते हैं। विशेषकर हनुमान्जीके हृदयमें अपार हर्ष है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 949 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
श्रीमुख बचन सुनत सब भाई। हरषे प्रेम न हृदयँ समाई।।
करहिं बिनय अति बारहिं बारा। हनूमान हियँ हरष अपारा।।
स्रोत अभिलेख 7.42 · पुस्तक पृ. 949, 949
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 श्रीमुख बचन सुनत सब भाई। हरषे प्रेम न हृदयँ समाई।।
English explanation
AI-generated draft: Hearing the words from Shri Rama’s lips, all the brothers rejoiced; their hearts could not contain their love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रीमुख | श्रीराम के पावन मुख से | from Shri Rama’s revered lips |
| बचन | वचन | words |
| सुनत | सुनते ही | upon hearing |
| सब | सभी | all |
| भाई | भाई | brothers |
| हरषे | हर्षित हुए | rejoiced |
| प्रेम | प्रेम | love |
| न | नहीं | not |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| समाई | समाता था | could be contained |
2 करहिं बिनय अति बारहिं बारा। हनूमान हियँ हरष अपारा।।
English explanation
They repeatedly make deeply humble entreaties; Hanuman’s heart is filled with boundless joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहिं | करते हैं | make |
| बिनय | विनम्र निवेदन | humble entreaties |
| अति | अत्यंत | very deeply |
| बारहिं | बार-बार | repeatedly |
| बारा | बार | time after time |
| हनूमान | श्रीराम के भक्त हनुमान | Hanuman, Rama’s devotee |
| हियँ | हृदय में | in the heart |
| हरष | हर्ष | joy |
| अपारा | अपार | boundless |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.42
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 949
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 949, 949
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।