उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लोभइ ओढ़न लोभइ डासन। सिस्त्रोदर पर जमपुर त्रास न।।
मूल पाठ
लोभइ ओढ़न लोभइ डासन। सिस्त्रोदर पर जमपुर त्रास न।।
काहू की जौं सुनहिं बड़ाई। स्वास लेहिं जनु जूड़ी आई।।
स्रोत अभिलेख 7.4 · पुस्तक पृ. 947, 948
भावार्थ
मूल पाठ के बादलोभ ही उनका ओढऩा और लोभ ही बिछौना होता है (अर्थात् लोभहीसे वे सदा घिरे हुए रहते हैं)। वे पशुओंके समान आहार और मैथुनके ही परायण होते हैं, उन्हें यमपुरका भय नहीं लगता। यदि किसीकी बड़ाई सुन पाते हैं, तो वे ऐसी [दु:खभरी] साँस लेते हैं मानो उन्हें जूड़ी आ गयी हो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 947 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 लोभइ ओढ़न लोभइ डासन। सिस्त्रोदर पर जमपुर त्रास न।।
English explanation
AI draft: Greed is their covering and greed their bedding. They are devoted to gratifying the genitals and belly, with no fear of Yama’s realm. The reading ‘सिस्त्रोदर’ is uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोभइ | लोभ ही | greed alone |
| ओढ़न | ओढ़ने का वस्त्र | covering |
| लोभइ | लोभ ही | greed alone |
| डासन | बिछाने का बिछौना | bedding |
| सिस्त्रोदर | संभवतः जननेंद्रिय और पेट | probably the genitals and belly |
| पर | में तत्पर; के परायण | devoted to |
| जमपुर | यम की पुरी; मृत्यु के बाद दंड का लोक | Yama’s realm of punishment |
| त्रास | भय | fear |
| न | नहीं | not |
2 काहू की जौं सुनहिं बड़ाई। स्वास लेहिं जनु जूड़ी आई।।
English explanation
If they hear someone being praised, they breathe as though stricken with a fever accompanied by chills.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काहू | किसी की | someone’s |
| की | की; संबंधसूचक | of; possessive marker |
| जौं | यदि | if |
| सुनहिं | सुनते हैं | they hear |
| बड़ाई | प्रशंसा | praise |
| स्वास | साँसें | breaths |
| लेहिं | लेते हैं | they take |
| जनु | मानो | as though |
| जूड़ी | कँपकँपी वाला बुखार | fever with chills |
| आई | आ गई हो | has come upon them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 947
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 947, 948
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।