उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जब काहू कै देखहिं बिपती। सुखी भए मानहुँ जग नृपती।।
मूल पाठ
जब काहू कै देखहिं बिपती। सुखी भए मानहुँ जग नृपती।।
स्वारथ रत परिवार बिरोधी। लंपट काम लोभ अति क्रोधी।।
स्रोत अभिलेख 7.4 · पुस्तक पृ. 947, 948
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर जब किसीकी विपत्ति देखते हैं, तब ऐसे सुखी होते हैं मानो जगत्भरके राजा हो गये हों। वे स्वार्थपरायण, परिवारवालोंके विरोधी, काम और लोभके कारण लम्पट और अत्यन्त क्रोधी होते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 948 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जब काहू कै देखहिं बिपती। सुखी भए मानहुँ जग नृपती।।
English explanation
When they see someone in distress, they become as happy as though they were kings of the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| काहू | किसी की | someone’s |
| कै | की; संबंधसूचक | of; possessive marker |
| देखहिं | देखते हैं | they see |
| बिपती | विपत्ति; संकट | distress; calamity |
| सुखी | प्रसन्न | happy |
| भए | हो गए | became |
| मानहुँ | मानो | as though |
| जग | संसार के | of the world |
| नृपती | राजा | kings |
2 स्वारथ रत परिवार बिरोधी। लंपट काम लोभ अति क्रोधी।।
English explanation
They are absorbed in self-interest and hostile to their families: debauched, lustful, greedy, and extremely wrathful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्वारथ | अपना हित; स्वार्थ | self-interest |
| रत | लगे हुए | absorbed in |
| परिवार | परिवार के | toward their family |
| बिरोधी | विरोध रखने वाले | hostile |
| लंपट | दुराचारी; भोगों में लिप्त | debauched; given to sensual indulgence |
| काम | कामना से भरे | lustful |
| लोभ | लोभ से भरे | greedy |
| अति | अत्यंत | extremely |
| क्रोधी | क्रोध करने वाले | wrathful |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 948
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 947, 948
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