उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लता बिटप मागें मधु चवहीं। मनभावतो धेनु पय स्त्रवहीं।।
मूल पाठ
लता बिटप मागें मधु चवहीं। मनभावतो धेनु पय स्त्रवहीं।।
ससि संपन्न सदा रह धरनी। त्रेताँ भइ कृतजुग कै करनी।।
स्रोत अभिलेख 7.23 · पुस्तक पृ. 932, 933
भावार्थ
मूल पाठ के बादबेलें और वृक्ष माँगनेसे ही मधु (मकरन्द) टपका देते हैं। गौएँ मनचाहा दूध देती हैं। धरती सदा खेतीसे भरी रहती है। त्रेतामें सत्ययुगकी करनी (स्थिति) हो गयी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 932 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 लता बिटप मागें मधु चवहीं। मनभावतो धेनु पय स्त्रवहीं।।
English explanation
Vines and trees drip honey when asked. Cows yield milk as desired.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लता | लताएँ | vines |
| बिटप | वृक्ष | trees |
| मागें | माँगने पर | when asked |
| मधु | मधु, शहद | honey |
| चवहीं | टपकाते हैं | drip or exude |
| मनभावतो | मनचाहा | as desired |
| धेनु | गायें | cows |
| पय | दूध | milk |
| स्त्रवहीं | बहाती हैं, देती हैं | yield |
2 ससि संपन्न सदा रह धरनी। त्रेताँ भइ कृतजुग कै करनी।।
English explanation
The earth remains ever rich in crops—the reading ‘ससि’ is uncertain here. Conditions like those of the golden age arose in the Treta age.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ससि | संभवतः फसल, अन्न | probably crops or grain |
| संपन्न | समृद्ध | rich in |
| सदा | सदा | always |
| रह | रहती है | remains |
| धरनी | पृथ्वी | the earth |
| त्रेताँ | त्रेतायुग में | in the Treta age |
| भइ | हो गई | came to be |
| कृतजुग | सत्ययुग | the golden age |
| कै | की | of |
| करनी | रीति, स्थिति | ways or conditions |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 932
- सहायक विषय
- रामराज्यका वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 932, 933
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।